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Saturday, May 9, 2015

My Mom and Father -Where are you?


अंसुअन धन फुट पारी , मैंने जब जब देखा आईने को
कैसे भुलाओ अपने से अपने को, कतरे से कतरे को
मेरी माँ एक ही डोरी थी जो टूट गयी।
वही तो थी जो खरी थी ,पिता के जाने के बाद
शिकायत तो अपने से थी की क्यों साथ नहीं थी
सच है कोई किसी के लिया नहीं रुकता है.
तो फिर क्या यही रिश्ता अंतिम था।
शायद था।
माँ तू ने कितनी बार बुलाया होगा मुझे , मैं तो थी
तेरे पास ही , बस शरीर कही और था।
अंसुअन धन फुट गिरी।
कभी कभी लगता है की अब जिया जाते है जीने को
बहाने तो सब गए जीने के.
अब तो ये सिलसिला चलने को जिन्दा हु
तेरी मिसाल को आगे तो बढ़ाना है.
सहारा है तो जो तूने एक पति और २ बच्चे  मढ दिए नहीं तो क्या करती क्या न कार्ति.
अंसुअन धन टूट गए